दुनिया की सबसे बड़ी बैटरी निर्माता कंपनी CATL (Contemporary Amperex Technology Co. Limited) ने इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर में ऐसा दांव खेला है, जिसने पूरी ऑटो और एनर्जी इंडस्ट्री का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। साल 2025 में कंपनी ने अपनी नई Naxtra ब्रांड की Sodium-Ion Battery लॉन्च कर दी है, जिसे EV बैटरियों का अगला बड़ा गेमचेंजर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक न केवल लिथियम-आयन बैटरियों की लागत और सप्लाई पर निर्भरता कम करेगी, बल्कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों को आम लोगों के लिए और ज्यादा किफायती भी बनाएगी। महंगे और सीमित लिथियम संसाधनों के दौर में CATL का यह कदम भविष्य की दिशा तय करता नजर आ रहा है।

CATL की नई Sodium-Ion तकनीक क्यों मचा रही है हलचल
लिथियम को अब तक बैटरी टेक्नोलॉजी का ‘सफेद सोना’ माना जाता रहा है, लेकिन इसकी कीमत, सीमित उपलब्धता और सप्लाई-चेन की जटिलताएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। इसके उलट सोडियम एक ऐसा तत्व है, जो पृथ्वी पर प्रचुर मात्रा में मौजूद है और आम नमक का प्रमुख हिस्सा भी है। CATL ने इसी साधारण तत्व से असाधारण Sodium-Ion Battery तैयार की है।
कंपनी के अनुसार Naxtra सीरीज की बैटरी का एनर्जी डेंसिटी करीब 175 Wh/kg तक पहुंचता है, जो मौजूदा LFP बैटरियों के बेहद करीब है। कम लागत और बेहतर उपलब्धता के कारण CATL का लक्ष्य है कि आने वाले समय में Sodium-Ion तकनीक LFP मार्केट का बड़ा हिस्सा अपने नाम करे।
15 मिनट में चार्जिंग का दावा और सुपरफास्ट परफॉर्मेंस
CATL की नई बैटरी का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी चार्जिंग स्पीड है। कंपनी का दावा है कि यह बैटरी मात्र 15 मिनट में 5% से 80% तक चार्ज हो सकती है, जिससे EV यूजर्स का चार्जिंग टाइम लगभग पेट्रोल पंप के स्टॉप जितना रह जाएगा। इसके साथ ही CATL की दूसरी पीढ़ी की Shenxing सुपर-फास्ट चार्जिंग बैटरी का दावा है कि वह केवल 5 मिनट में 520 किलोमीटर तक की अतिरिक्त रेंज जोड़ सकती है।
खास बात यह है कि यह प्रदर्शन ठंडे मौसम, यहां तक कि -10 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी बना रहता है, जिससे लंबी दूरी की यात्राओं में चार्जिंग ब्रेक लगभग खत्म हो सकते हैं।
ठंड, सुरक्षा और लागत में लिथियम पर भारी
Sodium-Ion बैटरियों का एक बड़ा फायदा यह है कि ये कड़ाके की ठंड में भी बेहतरीन प्रदर्शन देती हैं। जहां लिथियम बैटरियों की रेंज सर्दियों में काफी गिर जाती है, वहीं Sodium-Ion बैटरी -20 डिग्री सेल्सियस तक करीब 90 प्रतिशत क्षमता के साथ काम करने में सक्षम बताई जा रही है।
इसके अलावा सुरक्षा के लिहाज से भी यह तकनीक मजबूत मानी जा रही है, क्योंकि इसमें थर्मल रनअवे यानी आग लगने का खतरा कम होता है। लागत की बात करें तो सोडियम की उपलब्धता के कारण इन बैटरियों की कीमत लिथियम बैटरियों से 30 से 40 प्रतिशत तक कम हो सकती है।
भारत और EV भविष्य पर इसका क्या असर होगा
भारत जैसे देश के लिए यह तकनीक बेहद अहम साबित हो सकती है, जहां EV की ऊंची कीमत अब भी बड़ी चुनौती है। सस्ती और सुरक्षित Sodium-Ion बैटरियां इलेक्ट्रिक गाड़ियों की कुल लागत घटा सकती हैं, पब्लिक चार्जिंग नेटवर्क पर दबाव कम कर सकती हैं और ग्रिड-स्टोरेज को भी किफायती बना सकती हैं। हालांकि मास प्रोडक्शन और बाजार में बड़े पैमाने पर उपलब्धता को लेकर अभी समय लगेगा, लेकिन संकेत साफ हैं कि आने वाले वर्षों में लिथियम-आयन बैटरियों का दबदबा कमजोर पड़ सकता है।
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