PM Surya Ghar योजना में बड़ा बदलाव! MNRE ने बदले Service Charge नियम, राज्यों को मिलेंगे ₹200 करोड़

भारत सरकार की महत्वाकांक्षी PM Surya Ghar: Muft Bijli Yojana को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव सामने आया है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने इस योजना के तहत मिलने वाले Service Charge से जुड़े नियमों में संशोधन किया है। इस बदलाव का मकसद रूफटॉप सोलर सिस्टम के तेजी से और सुचारू तरीके से क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना है। नए दिशानिर्देशों के तहत राज्यों की भूमिका को स्पष्ट किया गया है और उन्हें आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बनाने की कोशिश की गई है।

MNRE Updates Service Charge Norms for PM Surya Ghar

राज्यों और एजेंसियों को कैसे मिलेगा फायदा

संशोधित नियमों के अनुसार, योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी पहले की तरह State Implementation Agencies (SIAs) के पास ही रहेगी, जो अधिकतर मामलों में बिजली वितरण कंपनियां (DISCOMs) होंगी। हालांकि अब राज्यों को यह अधिकार भी दिया गया है कि वे चाहें तो वैकल्पिक एजेंसियों, जैसे कि State Renewable Energy Development Agencies को भी नामित कर सकते हैं। SIAs को राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर समर्पित प्रशासनिक ढांचा तैयार करना होगा, ताकि योजना का लाभ आम उपभोक्ताओं तक बिना देरी के पहुंच सके।

MNRE ने कुल ₹657 करोड़ के Service Charge फंड में से ₹200 करोड़ को SIAs के लिए बेस सर्विस चार्ज के रूप में तय किया है। यह राशि राज्यों में घरेलू बिजली उपभोक्ताओं की संख्या के आधार पर दी जाएगी या फिर न्यूनतम ₹50 लाख, जो भी अधिक हो। यह पैसा हर वित्त वर्ष की शुरुआत में तीन समान किश्तों में जारी किया जाएगा, जिससे राज्यों को वित्तीय योजना बनाने में आसानी होगी।

Model Solar Village पर खास फोकस

सरकार ने इस संशोधन में Model Solar Village को भी विशेष महत्व दिया है। इसके तहत प्रत्येक चयनित गांव के लिए ₹5 लाख का Service Charge दिया जाएगा। वहीं उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पूर्वोत्तर राज्यों और द्वीपीय केंद्र शासित प्रदेशों जैसे विशेष श्रेणी वाले राज्यों में यह राशि ₹7.5 लाख होगी। आधी राशि गांव के चयन और प्रारंभिक गतिविधियों, जैसे DPR तैयार करने के बाद जारी की जाएगी, जबकि शेष राशि परियोजना के पूरा होने पर दी जाएगी।

इस पहल का उद्देश्य गांवों को सोलर ऊर्जा के मॉडल के रूप में विकसित करना है, ताकि ग्रामीण भारत में भी स्वच्छ ऊर्जा का लाभ तेजी से पहुंचे और बिजली बिल पर बोझ कम हो।

Service Charge के उपयोग और जवाबदेही के नए नियम

नए दिशानिर्देशों में यह भी साफ किया गया है कि Service Charge का उपयोग किन-किन कार्यों में किया जा सकता है। इसमें Program Management Units और Project Management Cells की तैनाती, आईटी और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड, स्टाफ की नियुक्ति, नेट-मीटरिंग की सुविधा, निरीक्षण, थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन, वेंडर मैनेजमेंट और कॉल सेंटर जैसी सुविधाएं शामिल हैं। साथ ही, SIAs को अपने फंड का एक हिस्सा फील्ड यूनिट्स पर खर्च करने के निर्देश दिए गए हैं।

MNRE ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी एजेंसियों को समय-समय पर उपयोगिता रिपोर्ट, ऑडिटेड खर्च विवरण और अन्य जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। किसी भी अप्रयुक्त राशि को ब्याज सहित सरकारी वित्तीय नियमों के तहत वापस करना होगा। जरूरत पड़ने पर मंत्रालय भविष्य में इन नियमों में और बदलाव करने का अधिकार भी अपने पास रखता है।

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