100W से लेकर 700W तक: आपका सोलर पैनल सही है या दुकानदार ने बना दिया बेवकूफ? जानिए पूरी डिटेल्स 

आजकल मार्केट में 100W से लेकर 700W तक के सोलर पैनल आम हो गए हैं, लेकिन क्या आपको मालूम है कि हर पैनल हर कंडीशन में एक जैसा परफॉर्म नहीं करता? 100W वाले छोटे पैनल उन घरों के लिए सही हो सकते हैं जहाँ सिर्फ एक पंखा या मोबाइल चार्ज करना हो। लेकिन अगर आप 1 किलोवॉट के लोड जैसे कूलर, फ्रिज या मॉडर्न इन्वर्टर पर निर्भर होना चाहते हैं तो 100W×10 लगाने का मतलब नहीं बनता। दुकानदार अक्सर कहता है “छोटा पैनल रहेगा तो टूटेगा नहीं” लेकिन असल में छोटे पैनल की कैपेसिटी भी कम होती है और लॉन्ग-टर्म ROI के हिसाब से यह महंगा साबित होता है।

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मोनोक्रिस्टलाइन या पॉलिक्रिस्टलाइन जैसे बेसिक टेक्नोलॉजी वाले पैनल कम कीमत में मिलते जरूर हैं, लेकिन लो लाइट कंडीशन और हाई टेंपरेचर में उनकी एफिशिएंसी तेजी से गिर जाती है। इसलिए पैनल चुनते समय सिर्फ वॉट नहीं, उसकी टेक्नोलॉजी, टेंपरेचर कोएफ़िशिएंट और लो लाइट परफॉर्मेंस पर भी ध्यान दें।

मोनोफेशियल vs बायफेशियल: असली फर्क

मोनोफेशियल पैनल में सिर्फ फ्रंट साइड ही सोलर सेल होती है, जबकि पीछे ब्लैक शीट होती है जो रेयर साइड से रिफ्लेक्ट होने वाली सनलाईट को वापस ब्लॉक कर देती है। इसका मतलब टेंपरेचर तेजी से बढ़ने पर एफिशिएंसी में भारी गिरावट आती है। दूसरी ओर, बायफेशियल पैनल ग्लास-टू-ग्लास कंस्ट्रक्शन के साथ दोनों तरफ से ऊर्जा जेनरेट करते हैं। रियर साइड से भी कुछ प्रतिशत यूटिलिटी मिलने से कुल आउटपुट तकरीबन 5–10% तक बढ़ जाता है।

यदि आपने जीरो स्ट्रक्चर (लो माउंट) पर पैनल लगवाना है, जहाँ नीचे से भी रिफ्लेक्टिव ग्राउंड कवर मिलता है तो बायफेशियल पैनल आपका बेस्ट चॉइस होगा। ये गरमी में कम हीट-अप होते हैं और डिग्रेडेशन रेट भी मोनोफेशियल से आधा होता है। दुकानदार कभी-कभार बायफेशियल को “बेकार” बताकर ग्राहक को बचाने का दिखावा करते हैं, लेकिन सही इंस्टॉलेशन और रिफ्लेक्शन कैलकुलेशन के साथ ये सबसे फायदेमंद रहते हैं।

Monoperc, TopCon और HJT तकनीकें 

आज के समय में तीन प्रमुख टेक्नोलॉजीज़ ट्रेंड कर रही हैं: Monoperc (M10), TopCon और HJT/HDT।
Monoperc (M10) में एफिशिएंसी करीब 20–21% होती है। यह सस्ती होती है और मॉडरेट क्लाइमेट वाले इलाकों (जैसे मुंबई, गोवा) में बढ़िया काम करती है। लेकिन धूल-भरी या गर्म जगहों पर इसे छोटे ग्लास की वजह से नुकसान जल्दी हो सकता है।
TopCon टेक्नोलॉजी में ग्लास-टू-ग्लास डिजाइन मिलता है और एफिशिएंसी बढ़कर 21–22% होती है। यह लो लाइट में बेहतर परफॉर्मेंस देती है, ठंडे इलाकों (जैसे कश्मीर) में भी टिकाऊ रहती है और बंदरों या ओलों के चलते टूटने की संभावना कम होती है।
HJT/HDT (Heterojunction) टेक्नोलॉजी अब सबसे एडवांस ऑप्शन है—इसमे 23–24.5% तक एफिशिएंसी मिलती है, ग्लास-टू-ग्लास डिज़ाइन और डिग्रेडेशन रेट मात्र 2% प्रति साल होता है धूल, तेज गर्मी, फैक्ट्री एरिया या ऊंची जगहों पर सफाई की जरूरत कम होने की वजह से यह लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट के लिए बेस्ट है।

सही पैनल चुना या नहीं– कैसे जाने

सही चॉइस सुनिश्चित करने के लिए इन सवालों पर गौर करें:

  • आपकी लोड रिक्वायरमेंट: सिर्फ लाइट-पंखे के लिए 100–150W अच्छा है, 1–2 kW लोड के लिए M10 या TopCon और 5 kW+ के लिए HJT पैनल सही रहेगा।
  • मौसम और टेंपरेचर: 45°C से ऊपर वाले इलाकों में TopCon या HJT की जरूरत होती है। मॉडरेट क्लाइमेट में M10 ठीक रहेगा।
  • स्पेस: कम जगह हो तो HJT ग्लास-टू-ग्लास, ज्यादा आउटपुट डेंसिटी देता है।
  • ROI और डिग्रेडेशन: डिग्रेडेशन रेट जितना कम, ROI उतना तेज। HJT में सालाना 2% के आसपास डिग्रेडेशन, जबकि मोनो में 4% तक होता है।
  • बजट: शुरुआत में M10 सस्ता दिखेगा, लेकिन लॉन्ग-टर्म में HJT बेहतर रिटर्न देगा।

अंतिम सलाह: दुकानदार की बात सिर्फ एक इनपुट है आपकी ज़रूरत, बजट, मौसम और स्पेस को समझकर ही पैनल चुनें। सही टेक्नोलॉजी और वॉटेज का चुनाव करके आप कम खर्च में ज़्यादा बिजली पैदा कर सकते हैं और लंबी अवधि में अपनी इन्वेस्टमेंट का पूरा मुनाफा पा सकते हैं।

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